नवरात्रि पूजन विधि एवं कलश स्थापना, जाने नवरात्रि की सही पूजा विधि


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हमारा देश भारत एक सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं वाला देश है. जैसा के हम सभी जानते है के के हमारे देश में नवरात्री का त्यौहार पुरे हर्सोउल्लास के साथ मनाया जाता है. नवरात्री के पुरे 9 दिन देश भर में खुशियों और पूजा पाठ का अनोखा संगम देखने को मिलता है. नवरात्रि का त्यौहार काफी श्रद्धा पूर्वक और पूरी निष्ठां के साथ मनाया जाता है. नवरात्रि का यह पावन त्यौहार साल में दो बार आता है. हिंदू धर्म में इस त्यौहार की शुरुआत से ही नए साल का आगमन किया जाता है.

इस दिन लोग दुर्गा माँ के नो रूप यानी श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कूष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी और श्री सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं.आज के इस पोस्ट में हम आपको नवरात्री पूजन विधि, कलश स्थापना एवं इस त्यौहार के साथ जुडी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जो बहुत से लोगों को शायद मालूम नहीं है. नवरात्री के पूजन विधि के बारे में आप यह विस्तार से जान सकते है.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको यह बता दे की नवरात्रि का यह पावन त्यौहार हर साल दो बार आता है जिसमे से एक शारदीय नवरात्र और दूसरा चैत्रीय नवरात्र कहलाया जाता है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुशार, नवरात्री पूजन विधि को लेकर कईं तरह के रीति रिवाज़ बनाए गए हैं. इस त्यौहार के पहले दिन कलश और देवी माँ की चौकी की स्थापना की जाती है. इसके बाद नोवें दिन माता की पूजा करने के बाद कुंवारी कन्यायों को भोजन करवाया जाता है.

इस पावन त्यौहार में लोग 9 दीनो तक व्रत रखते हैं ताकि ममतामयी माँ दुर्गा की असीम कृपा हो और उनकी हर मनोकामना पूरी हो सके. नवरात्री के इन 9 दिनों के अन्तराल में लोग प्रात: काल उठकर स्नान करते हैं और मंदिर जाकर माता के दर्शन करते हैं.

माता की चौकी एवं कलश की स्थापना के लिए कुछ वस्तुओं की आवश्यकता पडती है जिनमे गंगाजल, रोली, मौली, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, फल, फूल की माला, बिल्वपत्र, चावल, केले का खम्भा, चंदन, घट, नारियल, आम के पत्ते, हल्दी की गांठ, पंचरत्न, लाल वस्त्र, चावल से भरा पात्र, जौ, बताशा, सुगन्धित तेल, सिंदूर, कपूर, पंच सुगन्ध, नैवेद्य, पंचामृत, दूध, दही, मधु, चीनी, गाय का गोबर, दुर्गा जी की मूर्ति, कुमारी पूजन के लिए वस्त्र, मुख्य रूप से इस पूजा में शामिल हैं.

माँ दुर्गा के इस खाश पूजा अर्चना विधि में पूजन से पहले कलश एवं मूर्ति स्थापना के लिए सबसे पहले गणपति तथा मातृक की पूजा करनी चाहिए. इसके पश्चात पृथ्वी पूजन करके एक घड़े में आम के पत्ते, दूब, पंचामुल, पंचगव्य डालकर उसके मुंह पर एक सूत्र बाँध दें. इसके बाद्द आप घाट के पास गेंहू और जों का पात्र रख दें और वरुण देव तथा माँ भगवती की अर्चना करें.

विधि विधान से दुर्गा के पाठ करने के बाद आप कन्या पूजन करें. कन्या पूजन के लिए बालिकाओं की उम्र लगभग 10 साल के बीचों बीच होनी चाहिए. पाठ की संपन्नता के बाद हो सके तो कुछ ब्राह्मणों को भोजन भी जरूर करवाएं.


नवरात्रि पूजन की सम्पूर्ण विधि में सबसे पहले अपने बाएं हाथ की हथेली में जल लें. दाहिने हाथ की अनामिका उंगली के आस-पास की उंगलियों में निम्न मंत्र बोलते हुए स्वयं के ऊपर एवं पूजन सामग्री के ऊपर गंगा जल छिड़कें और फिर इस मंत्र का जाप करे.

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्था गतोऽपि वा..
या स्मरेत पुण्डरीकक्ष्यं स बहामायंतर: शुचि:..

अब घी का दीपक जलाएं और अक्षत एवं पुष्प से पूजन करें और हो सके तो अगरबत्ती या धूप भी जला लें, अब कलश की स्थापना करके गणेश जी का पूजन करें. इसके पश्चात दुर्गा मां का ध्यान लगाकर हाथ में अक्षत पुष्प लेकर इस मंत्र का जाप करें.

श्री जदाम्बाये दुर्गा देव्यै नम:..
दुर्गा देवी माँ वाहयामि.

अब कुछ अक्षत और पुष्प दुर्गा मां की मूर्ति पर समर्पित कर दें और मां की मूर्ति को जलियां कच्चे दूध से स्नान करवाएं. इस पावन स्नान के बाद मूर्ति को नए आभूषण पहनाएं और कुमकुम इतर या माला को मूर्ति के अर्पित करें. इसके पश्चात दुर्गा मां की प्रतिमा के सामने नारियल मिठाईयां ऋतु फल अर्पित करें. अब दुर्गा चालीसा का पाठ करते हुए अंत में दुर्गा मां की आरती करें और पुष्पांजलि समर्पित करें. माँ दुर्गा की पूजा के संपूर्ण होने के बाद ममतामयी माँ से अपनी पिछली सारी गलतियों की माफी मांग कर इस पूजा विधि को पूजा संपन्न करें.


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