पति के लापता होने के बाद इस महिला ने बोलेरो पर चलता फिरता रेस्टोरेंट खोला, मदद करने को आगे आए आनंद महिंद्रा


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एक बहुत पुरानी कहावत है की “कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती” जी हाँ सही मायने में ये बिलकुल सत्य है. क्यूंकि आज जो पोस्ट हम आपके लिए लेकर आये है, वो पढ़ कर आपके आँखें नाम हो जाएगी. ये कहानी शिल्पा नाम की एक महिला की है जो मंगलौर में एक मोबाइल फूड आउटलेट चलाती हैं. उन्होंने महिंद्रा के बोलेरो पिकअप ट्रक को ही एक रेस्टुरेंट का रूप दे दिया है.

मंगलौर शहर में गांधीनगर इलाके के आस-पास ‘हल्ली मेन रोटी’ के नाम से रेस्टुरेंट चालने वाली शिल्पा की जिंदगी काफी दुःख से भरी रही है.

शिल्पा ने केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. उनके हालात ही कुछ ऐसी थी की उन्हें पढाई छोड़कर अपने घर का सारा बोझ उठाना पड़ गया थे. शिल्पा ने बताया था की मैं कभी भी अपना बिजनेश नहीं करना चाहती थी. शिल्पा एक गरीब परिवार से है. साल 2005 मे उनकी शादी हो गई और उनके पति का नाम राजशेखर है. शादी के बाद वो अपने पति और तीन साल के बच्चे के साथ मंगलौर आकर रहने लगीं.

शिल्पा जी के पति एक ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करते थे. दरअसल साल 2008 में जब शिल्पा के पति बेंगलुरु गए तो वो अभी तक वापस नहीं आये है. शिल्पा ने इस्कूल लेकर पुलिस में रिपोर्ट भी लिखवाया लेकिन अब तक कुछ भी पता नहीं पाया है. शिल्पा के पती के लापता होने के बाद मानो उनका परिवार पूरी तरह से टूट गया है.

एक समय ऐसा आया की शिल्पा की मुश्किलें हद से ज्यादा बढ़ गयी. वो बच्चे की पढाई की फ़ीस भी नहीं दे पा रही थी. घर की परेशानियों को हल करने के लिए उन्होंने साइबर में काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने सेल्समेन का भी काम किया जिससे की वो किसी तरह महीने के केवल 6000 कमा कर किसी तरह गुजारा कर सके. एक बार की बात है जब शिल्पा ने अपने घर वालो को खाना बना कार खिलाया तो उनके घर वालो ने उनकी बड़ी तारीफ की फिर तभी से शिल्पा के मन में पहली बार रेस्टोरेंट खोलने का विचार आया.

शिल्पा ने जो भी पैसे अपने बच्चे के लिए सेव कर के रखा था उसे निकाला और एक नया पिकअप ख़रीदा. एक महिला का ऐसे काम करना कई लोगो को पसंद नहीं आया. शिल्पा को ऐसा करते देख कई लोगो ने उन्हें बहुत कुछ कहा लेकिन शिल्पा ने उन सभी की बातो पर ध्यान न देते हुए अपना काम शुरू कर दिया और खाना बनाना शुरू कर दिया. आज वो रोजाना के सात हजार काम लेती है.

शिल्पा के इस काम में उनका पूरा परिवार सहायता करता है. उनके इस बिज़नेस में उनके माता पिता सब्जिया बाजार से लाते है, और उनका भाई जो पहले सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था लेकिन अब वो अपने बहन का हाथ बटाता है. शिल्पा के इस कामयाबी के पीछे यही कारण है की उन्होंने कभी अपनी आस नहीं तोड़ी. वो कहती है की मेरे पति कभी न कभी वापस जरूर आएंगे. ये जानकार उनके लिए सच मे खुशी होती है की वो अब जल्द ही एक और रेस्टोरेंट खोलने वाली है.


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